क्यों दुखी होता मन तू,
चलने का वक़्त है समझ तू।
छूट जाते है कई पीछे राहों में,
पर लक्ष्य है तेरा कुछ नया पाने में।
ना हो, दुःख ना रहेगा
हरदम तेरे साथ,
पाएगा अपनी तू मंजिल
जरा दे तो हाथ।
देख छितिज में सूरज की लालिमा को
बढ़ आगे और भूल विपदा को।
चलने का वक़्त है समझ तू।
छूट जाते है कई पीछे राहों में,
पर लक्ष्य है तेरा कुछ नया पाने में।
ना हो, दुःख ना रहेगा
हरदम तेरे साथ,
पाएगा अपनी तू मंजिल
जरा दे तो हाथ।
देख छितिज में सूरज की लालिमा को
बढ़ आगे और भूल विपदा को।
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