ज़िस देश मे आधी आबादी
गरीबी मे हो,
ज़िस देश मे लड़कियों की संख्या
लड़कों से कम हो,
ज़िस देश मे आज भी दलित
नज़रबंद हो,
हिन्दू-मुसलमान के नाम पर
होता हुडदंग हो,
वहाँ यह गेम क्या नयी आजादी लायगा?
या तथाकथित विकास का मोहर भर रह जाऐगा!
हमे न चाहिये यह चका-चौंध ,न यह विकास।
अपना तो यही आस,हो ना और विनाश॥
bahut khoob alok aapne ne apne jazbaaton apne gusse ko shabdon mein achchha piroya hai bahut khoob likhte rahiye lekhin dhaar daar hoti rahegi din b din mitra
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